अब होंगे सपने साकार भाग -1
अब होंगे सपने साकार भाग -1
ज़िन्दगी एक बाँसुरी है
ज़िन्दगी एक बाँसुरी है। उसमें दुःख रूपी छेद तो बहुत सारे हैं, पर जिसको बाँसुरी बजानी आ जाती है, वह उन छेदों में भी मीठा संगीत पैदा कर लेता है।
ज़िन्दगी जलेबी की तरह होती है। यह टेढ़ी-मेढ़ी ज़रूर होती है, पर मुस्कान की चाशनी अगर हम लगाते रहेंगे, तो यह भी सबको मधुर लगेगी।
ज़िन्दगी एक गजब की परीक्षा है। जब परीक्षा की ज़िंदगी खत्म हो जाती है, तो ज़िंदगी की परीक्षा होनी शुरू हो जाती है।
ज़िन्दगी में हर किसी को अहमियत दीजिए। विश्वास रखिए, जो अच्छे होंगे वे आपको सबक देंगे।
ज़िंदगी में सदा खुश रहो। गम को भुला दीजिए। न खुद रूठिए, न दूसरों को रूठने का अवसर दीजिए। खुद भी हंसकर जीने की कोशिश कीजिए और दूसरों को भी हंसकर जीना सिखा दीजिये।
पानी से कभी तस्वीर नहीं बनती और ख्वाबों से कभी तकदीर नहीं बनती। ज़िंदगी में श्रेष्ठ कर्म करते रहिये, क्योंकि यह जिंदगी बार-बार नहीं मिलती।
कभी भी पीपल के पत्तों जैसा मत बनिए जो वक्त आने पर सूखकर गिर जाते हैं। ज़िंदगी में हमेशा मेंहदी के पत्तों की तरह बनिये, जो खुद पिसकर भी दूसरों की ज़िंदगी में रंग भर देते हैं।
हमारी ज़िंदगी तस्वीर भी है और तकदीर भी, अगर इसमें अच्छे रंग मिलाओगे, तो तस्वीर सुन्दर बन जाएगी और अच्छे कर्म करोगे, तो आपकी तकदीर सँवर जायेगी।
हमेशा जोड़ने की कोशिश कीजिए, तोड़ने की नहीं। संसार में सुई बनकर रहिये, कैंची बनकर नहीं। सुई दो को एक कर देती है और कैंची एक को दो कर देती है।
दुनिया में गाय की तरह रहो, साँप की तरह नहीं। गाय घास खाती है, पर बदले में दूध देती है; साँप दूध पीकर भी बदले में जहर देता है। जो गाय की तरह रहेंगे वे गोविंद की तरह पूजे जायेंगे, जो साँप की तरह रहेंगे वे शैतान कहलाएंगे।
जीवन में चार चीजें कभी मत तोड़िए। 1. विश्वास 2. रिश्ता 3. दिल 4. वचन। जब भी ये टूटते हैं तो कोई आवाज तो नहीं होती लेकिन दर्द बहुत होता है।
रचयिता - परम पूज्य जनसंत उपाध्याय श्री 108 विरंजन सागर जी महाराज
क्रमशः
द्वारा -सरिता जैन
सेवानिवृत्त हिन्दी प्राध्यापिका
हिसार
🙏🙏🙏
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